वैदिक चेतना शिविर
Event Start Date : 17/04/2026 Event End Date 17/04/2026





प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 17 अप्रैल 2026 को विद्यालय प्रांगण में प्रधानचार्या श्रीमती रश्मिराज बिश्वाल जी के निर्देश पर, कक्षा आठवी के सभी छात्र - छात्राओं के लिए एक दिवसीय वैदिक चेतना शिविर का आयोजन किया गया । जिसमें प्रातः 8:00 से 2:00 तक, योग, ध्यान, हवन, प्रातःराश, बौद्धिक उद्बोधन, भोजन, वैदिक चर्चा और छात्र उद्बोधन का आयोजन किया गया। जिसमें प्रातः 8:00 से 2:00 तक, योग, ध्यान, हवन, प्रातःराश, बौद्धिक उद्बोधन, भोजन, वैदिक चर्चा और छात्र उद्बोधन का आयोजन किया गया।प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मिराज बिस्वाल जी ने वैदिक चेतना शिविर के प्रथम सत्र को सम्बोधित क़रते हुए कहा कि हम सभी सौभाग्य शाली हैं जो शिक्षण प्रक्रिया के साथ साथ नैतिक संवर्धन की प्रक्रिया का निर्वहन करते हैं, क्योंकि शिक्षण परिवेश पर निर्भर करता,हमारी शारीरिक और मानसिक स्वस्थता पर निर्भर करता हैं, इसलिए प्रत्येक वर्ष एक दिवसीय चेतना शिविर का आयोजन किया जाता हैं, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नैतिक और समाजिक मूल्यों के संवर्धन को मुख्यता देता है क्योंकि डी॰ ए॰ वी॰ संस्थाएं अपने स्थापना काल से ही इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती रहती है,जो छात्र छात्राओं में नैतिक मूल्यों के संवर्धनार्थ, वैदिक संस्कृति के ज्ञानार्थ, श्रेष्ठ आचरण का निर्माण कर सके,उसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हम विद्यालय में प्रतिवर्ष की भांति नैतिक, आत्मिक और सामाजिक विकास की सतत उन्नति के प्रयास करते हैं। इस सन्दर्भ में वैदिक संस्कृति और महापुरुषों के जीवनचरित को नैतिक शिक्षा के माध्यम से पढ़ाया जाता है। जिससे बच्चों को इस बात का बोध हो सके, कि हमारे महापुरुषों की जीवन शैली और चिन्तन दृष्टि कैसी थी, जिससे वे उनके जीवन दर्शन से प्रेरित हो सके। हमारा आहार, व्यवहार कैसा हो इससे परिचित हो सके, शिविर का प्रारम्भ बच्चों ने योग, ध्यान और हवन में भाग लेकर किया, फिर प्रातःराश में दलिया व केलों का आहार करके बौद्धिक सत्र के लिए हॉल में उपस्थित हुए जहाँ वैदिक विद्वान् डॉ देवशर्मा जी ने "हम व्यवस्थित कैसे हों"इस विषय पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए जिसको बच्चों ने बहुत रूचि और जिज्ञासा से श्रवण कियाफिर दोपहर में बच्चों ने सामूहिक रूप से बैठकर भोजन किया, उसके कुछ अंतराल के पश्चात वैदिक ज्ञान पर एक प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई,जिसमें सभी छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया इसके बाद प्रधानाचार्या जी नें वक्ताओं का स्वागत और आभार व्यक्त किया और कहा- विद्वानों के उद्बोधन बच्चों को मानसिक, शारीरिक व सामाजिक दृढ़ता प्रदान करने में मदद करेंगे, साथ ही बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार खेल व अन्य क्रियाओं के साथ-साथ शिक्षा पर भी ध्यान से कार्य करने में मदद मिलेगी ।प्रधानाचार्या जी का आभार धन्यवाद व्यक्त करते हुए कार्य क्रम समाप्त हुआ